21 Jun 2017

खुला खत रिषी कपूर के नाम

जनाब रिषी कपूर साहब
क्या आप वही कपूर हो जो बॉबी से जवां दिलों पर राज करने लगा था  क्या आप वही ... रिषी कपूर हो जिसने अकबर इलाहाबादी बनकर लोगों को खूब हंसाया था
क्या आप वही ..रिषी कपूर हो जिसने रउफ लाला बनकर लोगों को डराया भी था
नहीं जनाब आप वो रिषी कपूर नहीं रह गये बिल्कुल नहीं
क्योंकी पिछले दिनों क्रिकेट के फाईनल से पहले जिस तरह आपके कमेंट आये थे उससे लगता है आपके अंदर का एक्टर खत्म हो चुका है..
यह आप ही का कथन था ना की बाप बाप होता है . ठीक ही कहा लेकिन उसी बैटे नें बाप को हरा दिया
अब आपके बड़बोलेपन का क्या हुआ..
और हां बैटा बाप के जैसा नहीं बन सकता लैकिन कोशिश तो कर ही सकता है ना और आप जिस खानदान से आते हैं उसका इंडिया तो बहूत मान सम्मान है. उस खानदान के अच्छे बैटे बनिये.
जनाब इस टुच्ची सी पब्लिसिटी के लिये यह क्यों भूल जाते हैं की आपके फॉलोअर्स पड़ोसी देश में भी है
खैल खैल होता है और आप जैसे लोग इस खैल को भी जंग के नजरिये से देखते है
और हम बेवकूफ लोग आपको फॉलो करते है
आप तो कुछ भी उलटा सीधा कह देते है और फिर पलट कर माफी भी मांग लेते है
लेकिन आपके फॉलोअर्स बैचारों के दिल पर ना जाने क्या बीतती होगी
जनाब काश आप जितने अच्छे एक्टर हो अगर इंसान भी उतने ही अच्छे होते ...

28 Feb 2017

जमील की कलम से 'नजीब' बोल रहा हूं

में नजीब अहमद..
शायद आप मुझे नाम से तो जानते ही होंगे
हां हां वही जो पिछले दिनों गायब हो गया था जो अब तक   नहीं मिला,जिसे ढूंढने के लिये ना जाने कितनें धरने हुऐ रेलियां निकाली गई
खूब हो हल्ला हुआ इसके बावजूद में नहीं मिला.
में कहां हूं यह में खुद नहीं जानता
क्यों गायब हूं यह भी नहीं जानता
जब में हिंदुस्तान के नामी कॉलेज के केम्पस से गायब हो सकता हूं और सारी दिल्ली की पुलिस, सरकार, यहां तक की हिन्दुस्तान के चप्पे चप्पे पर पैनी नजर रखने वाला और दूसरी दुनियां की यानी ऐलियंस तक की हर खबर पर नजर रखने वाला मीडिया भी मुझे नहीं ढूंढ पाया,

आखिर में कहां हू ?

में एक बार फिर आप सबसे गुजारिश कर रहा हूं की अब तो इंतजार करते करते मेरे परिवार वालों के आंसू भी सूख चुके होंगे, कोई तो मुझे ढूढ दो
....वरना याद रखना आज तो में गायब हुआ हूं कल को तुम भी गायब हो सकते हो और मेरी तरह तुम भी किसी को नहीं मिलोगे

सुना है हिंदुस्तान मे हर साल लाखों बच्चे गायब हो जाते है जिनकी खबर मीडिया तक नही पहूंचती उन बच्चों को कौन ढूंढता होगा ?
क्या वो सब मेरी तरह यूं ही भुला दिये जाते है

खैर अगर अब भी में कहीं किसी मोड़ पर मिल जाता हूं मुझे बता देना.....

29 Nov 2016

कातर कतारें

जब से देश में नोटबंदी हो गई
सियासत और भी गंदी हो गई

हल्की हल्की सांसे ले रही है इंसानियत
सुना है मजदूर की आवाज मंदी हो गई

लंम्बी लंम्बी यह जो कातर कतारें है
बेबस चेहरे देख आह भी ठंडी हो गई

चीखकर मांग रहे हैं हिसाब गरीब का
पसीने की कमाई भी अब रद्दी हो गई

कोसती थी एक दूसरे को हर आंख
सुना है नेताऔं मे रजामंदी हो गई

क्यों ? दिखता नहीं दर्द रहनुमाओं को
लाचार को हराने सियायत अंधी हो गई

28 Nov 2016

अंधेरा क्यों है

सोने की चिड़ीया से मुल्क में अंधेरा क्यों है
इस  दौर में भी  काला इतना सवेरा क्यों है

दिखती है अब हर शय में खौफ की आहट
सवेरा है मगर फिर भी घना अंधेरा क्यों है

माना की हर फैसले से वास्ता नहीं तेरा
मगर फिर भी हर फैसला तेरा क्यों है !

अजीब सवाल पूछ रह है निशब्द परिंदों से
इस दौर में बिजली के तार पर बसेरा क्यों है।

24 Jun 2016

रोल नंबर

'रोल नम्बर 1.. यस सर ! मेरे घर में टॉयलेट है
..
पूरा माजरा यह है की
गुजरात के नर्मदा जिले के प्राईमरी स्कुलों में अब हाजिरी के वक्त छात्रों को तीनों में से किसी एक वाक्य को बोलना होगा
1. मेरे घर में टॉयलेट है
2. मेरे घर में टॉयलेट नहीं है
3 .टॉयलेट का निर्माण हो रहा है
..
वाह रे देश की शिक्षा .
कहीं यह फरमान जारी ना दे की यह भी बोलना पड़ेगा ?
" में टट्टी  जाकर आया हूं
" में टट्टी  जाकर नहीं आया
" मुझे तो  कब्ज है
" में तो हंगता ही नहीं ..
.....
सोच रहा हूं की विदेशी लोग क्या सोचते होंगे जब ऐसी ऐसी  बातें विदेशी लोगों को पता चलती होगी

20 May 2016

हकीकत से रूबरू .

हकीकत से रूबरू  MJ Raju की कलम से
...............
1  हल्की हल्की बारिश हो रही है गरीब किसान अपने खैत में पैड़ के नीचे  बैठा है हाथ में कुदाल है रोटीयां कपड़े में लिपटी है लहलहाती फसल को यकटक देख रहा है बहूत खुश है .फसल अच्छी जो थी .

2  रेडियो पर खबर चल रही है हर जगह एक ही नारा है कांग्रेस मुक्त भारत होगा.मोदी जी की लहर चल गई .हर जगर शौर है पटाखे जलाऐ जा रहे हैं  मिठाईयां बांटी जा रही है

1  किसान सोच रहा था की इस साल अगर फसल अच्छी हुई तो बेटियों की शादी करूंगा बेटे को पढाउंगा सारा कर्ज चुका दुंगा गरीबी खतम होगी और हमारे भी अच्छे दिन आऐंगे

2  भाषणों का दौर शुरू हो चुका है किसी खैमे में खुशी है तो कहीं सन्नाटा पसरा है आरोप लगाऐ जा रहै हैं मंथन शुरू हो चुका है

1 बादलो की गड़गड़ाहट के बीच किसान का कलेजा हिल जाता है  अगर हल्की सी ज्यादा बारिश हुई या तेज हवा चली तो सारे सपने टूट जाऐंगे फिर पिछली बार की तरह कौई खबर नहीं लेगा कर्जा भी तो जीने नहीं देगा...

2 अगले चुनाव के लिऐ रणनीतियां बनाई जा रही है बधाईयां दी जा रही है शपथ की तैयारी हो रही है मंच सजाऐ जा चुके हैं..

1 अचानक हल्का सा तुफान आता है और किसान की सारी फसल बरबाद किसान की आंखों मे आंसू हैं की अब कर्ज कैसे चुकाउंगा  भारी मन से इसी पैड़ पर गले मे मफलर डाल लटक जाता है

2  शपथ के बाद नेता जी का पहला भाषण शुरू हो चुका है ...
में शपथ लेता हूं की में गरीबो के हक के लिऐ लड़ूंगा जो साठ सालों मे नहीं हुआ वो हम करेंगे हम कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार करेंगे हम रोजगार देंगे. किसानों का कर्ज माफ करने के बारे मे विचार करेंगे "अच्छे दिन आऐंगे "
..
काश, कांग्रेस मुक्त भारत की जगह गरीबी मुक्त भारत का नारा होता ...
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कुछ समझ में आया तो शेयर कीजिऐगा ....

12 Apr 2016

" डिसलाइक"

बड़ी विचित्र है इंटरनेट की दुनिया
यहाँ सच झूठ लगता है और झूठ सच लग सकता है | 
फेस बुक पर डाली गई अपनी नागवार Post पर भी 
आपको ढेरों ‘लाइक’ मिल सकते हैं
अरे,हमारी नापसंदगी के लिए भी तो कोई न कोई बटन होना 
चाहिए,
यह क्या,पसंद है तो भी लाइक, नापसंद है तो भी लाइक, 
बटन दबाना है तो बस लाइक पर ही दबा सकते हैं और कोई 
विकल्प है ही नहीं, 
अरे फेसबुक वालो अब तो इलेक्शन में भी ‘नाटो’ बटन स्वीकार कर लिया गया है 
ज़रा इस पर भी गौर कीजिए. जहां देखो स्माइली, हर तरफ लाइक – 
ये भी भला कोई बात हुई ! बड़ी ज्यादती है ! .....
...
hahahaha लेकिंग सुना है फेसबुक वाले " डिसलाइक" बटन ला रहे है
मजा तो तब आएगा जब ‘डिसलाइक’ का विकल्प हाथ लग जाएगा,
सुन्दर से सुन्दर सेल्फी पर ‘डिसलाइक’ बटन न दबाया तो कहना , ...