19 Dec 2015

18 साल की उम्र तक बलात्कार करते रहिये ...

18 साल की उम्र तक बलात्कार करते रहिये ...
 जी हां---अगर आपकी उम्र 18 साल से कम है तो आप बेफ़िक्र होकर बलात्कार कीजिये या फिर कोई भी जुर्म कीजिये हिन्दुस्तान का कानून आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता .
अगर आपकी भी मानसिकता इस तरह की है तो फिर नोच डालिए किसी निर्भया की इज्ज़त को
जितनी हेवानियत है आजमां लीजिये ...देर किस बात की है India gate फिर से आपके जुर्म का इंतज़ार कर रहा है ..जनता को भी तो मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरने का मोका मिलना चाहिए   
अगर गलती से कभी पकडे भी गए तो चिंता ना करे इसकी भी सुविधा हमारा कानून देता है
आपका कोई कुछ नहीं उखाड़ सकेगा आपके लिये केस लड़ने वाले NGO और बड़े बड़े वकील लाइन में खड़े होंगे आपको बस 2-3 साल तक  बाल सुधारगृह “ में मोज मस्ती करवाई जाएगी जेल नहीं होगी
बस दुःख इतना है की आपको दुनिया की नजरो से दूर रखा जायेगा ताकि जब आप 2-3 साल मस्ती मरने करने बाद जब बाहर आओगे तो आपको कोई पहचान ना सके .की यही वो बलात्कारी है
जब आप बाहर आओगे तो बड़े बड़े नेता और समाजसेवी आपके पुनर्वास की तैयारी में लगे होंगे
पुनर्वास के नाम पर आपको हजारों रूपये मिलेंगे ..आपके के लिए नोकरी भी तलाशी जाएगी ..

लेकिन हाँ ---बस आपकी उम्र 17 साल 364 दिन से कम होनी चाहिए 

13 Dec 2015

पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी

सच है की जिनकी सोच इस्लाम के बारे मैं गंदी है
वो हमेशा अपनी गंदी सोच का ही प्रमाण देगा ।।
इनका मुद्दा हमेशा से इस्लाम को नीचा दिखाना और
ईस्लाम का नेगेटिव प्रमोशन करना ही है ।
दुनिया जानती है की मुसलमानों के दिलो में
पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की क्या इज़्ज़त क्या रुतबा है
जिनको खुदा ने सारी इंसानियत के लिए शांति और
अमन का दूत बनाकर कर भेजा था उनकी शान में
बार बार गुस्ताखी करना किस बहादुरी का नाम..
पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के खिलाफ़ की गई टिप्पणी देश का
वातावरण बिगाड़ने का प्रयास है .जो गन्दी मानसिकता दर्शाती है
अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करने वालो ।।
आज़ादी का ये मतलब नही के किसी भी धर्म की आस्था
को ठेंस पहुंचाई जाए आज़ादी तो यह है के सच को सच
लिखा जाए बोला जाए।
अगर दम है तो इजराइल के ज़ुल्मो की दास्ताँ बारे में बोलो ।।
अगर दम है तो मज़लूमो की चीख पुकार के बारे में आवाज उठाओ।।
अगर शर्म है तो सीरिया के हालात के बारे में बोलो ।।
अगर इंसानियत है तो अमरीका के बर्बरता इराक़ पर बोलो ।।
अगर दिल है तो फलस्तीन की माओं का दर्द सुनाओ ।।
अगर दर्द है तो गुजरात आसाम के किस्से ब्यान करो ।।
यह है अभिव्यक्ति की आज़ादी..
किसी धर्म के बारे मैं गलत भाषा इस्तेमाल करना नहीं

लेकिन यह जो दोहरी मानसिकता के लोग है वो  एक तरफ़ा ही बोलते लिखते थे
और बोलते लिखते  रहेंगे लेकिन सच कभी नही बोलेंगे ।।

11 Dec 2015

" प्रेम रतन निजात पायो "

आज साबित हो गया की पैसे वाला कानून भी खरीद सकता है आश्चर्य नहीं होना चाहिए यह सब पैसे का ही खेल हे की ,गुजरात.हाशिमपुरा और ना जाने कितने दंगो के अपराधी मजे से घूम रहे है इस तरह के केस का फैसला तो अदालत के बाहर ही हो जाता है अदालत में तो सिर्फ दस्तखत होते है
वो क्या है ना पैसे में गर्मी ही इतनी होती है कि किसी का भी ईमान पिघल जाये वरना निचली अदालत सबूतों के आधार पर जिसको 5 साल की सजा सुनाती है और आज 10 महीने बाद उपरी अदालत कहती है सलमान के खिलाफ सबूत ही नहीं है ....भैय्या जनता इतनी भी बेवक़ूफ़ नहीं है .सब जानती है .               ''खैर पतंग उड़ाना कभी कभी फायदेमंद भी होता है .''बस गलती मरने वाले गरीब की थी वो फुटपाथ पर सो रहे थे उसे इतना तो ध्यान रखना चाहिए था की फुटपाथ सोने की जगह नहीं होती कभी किसी अमीर की गाड़ी भी फुटपाथ से गुजर सकती है .भैय्या गलत तो गरीब होता है और हमेशा गलत ही ठहराया जाता है खेर सब छोड़ो चलो सलमान शाहरुख़ की फिल्मे आ रही है उसपे चर्चा करो यहाँ लोगों का ईमान मर चूका है

8 Dec 2015

फलस्तीन की मिटटी


शायद तेरी कोख में बुझदिल पैदा नहीं होते ...
इसलिए ऐ फलस्तीन की मिटटी तुझे सलाम ..

जब भी फलस्तीन का जिक्र आता है जहन में एक बहादूर और सहन करने वाले लोगों की
छवि उभर आती है फलस्तीन की जनता पर क्रूर इस्राइली जुल्म की इंतिहा सालों से जारी है......
लेकिन ..........
फलस्तीन की उस जमीन को सलाम
जिसके के हर बगीचे को दुश्मनों ने रोंद दिया जहाँ की हर खिड़की का शीशा तक जुल्म का शिकार होकर टुटा है..स्कूल अजायब घर नजर आते है...उस देश की हर वादी में अमन का कत्ल हुआ है.
उस जमीन के हर घर में एक शहीद की तस्वीर दीवार पर जरूर मिलेगी है.......
उस जमीन की हर औरत को सलाम..........
जो खून से लथपथ अपने बच्चो को गोद में लेकर कहती है ऐ जालिम इससे ज्यादा तेरे जुल्म की इन्तिहा क्या होगी लेकिन फ़िक्र ना कर में ऐसे बहादुर बच्चो को फिर जन्म दूंगी
उस जमीन के हर बच्चे को सलाम....
यतीम होना इस देश के बच्चे शायद जानते तक न हो फिर भी दुश्मन के सामने खड़े होकर कहते है .
ढा ले जुल्म तू आखरी हद तक ऐ दुश्मन लेकिन .हम तेरे सामने नहीं झुकेंगे ..हम भी जवानी में कदम रखेंगे हम फिर लड़ेंगे ....क्योंकि हमें बहादुरी सिखाई जाती है. बुजदिली नहीं


ऐ फलस्तीनियों आखिर तुम किस मिट्टी के बने हो ..कितना जुल्म सहन करोगे .....

24 Nov 2015

कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है

जहाँ हर कोई बिन बात के आपस में लड़ रहा है
नफरत है शहर शहर किसान भी सूली चढ़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है

जहाँ एक तरफ भूख से बेहाल तरसते गरीब देखो
एक तरफ अनाज सरकारी गोदामों में सड़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा है

भूल गए इंसानियत धर्म मजहब पर हाहाकार देखो
कोई सुरक्षित नहीं भार महंगाई का जो पड़ रहा है
*फिर कैसे कह दूँ भारत आगे बढ़ रहा 

15 Nov 2015

राष्ट्रपति के नाम एक पत्र

महामहिम राष्ट्रपति जी आज जो अराजकता या असहिष्णुता फैली हुई है उसके बारे में

कुछ तो बोलिए जनाब ?
आज हमारा भारत सामाजिक विकास के महत्वपूर्ण मानदंडों पर पिछड़ता जा रहा है,
ऐसी स्थिति हमारे लोकतन्त्र के लिए खतरनाक है....यह आप भी बखूबी जानते है
जनाब ,लोकतन्त्र में जनता के भरोसे का खुलेआम मज़ाक बनाया जा रहा है ..
हमारे देश की गरीबी और पिछड़ेपन को विश्वभर में एक बाकायदा मंच लगाकर सुनाया जा रहा है
में पूछना चाहुगा जनाब क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में यही पाया है
गरीबी और विकास के बारे मैं कोई बात नहीं हो रही ..बात होती है सिर्फ धर्म और जाती की
कुछ भद्रजन इसको बखूबी  अंजाम दे रहे है ..
महामहिम आप ही ने कहा था अराजकता शासन का विकल्प नहीं हो सकती
लेकिन आज धर्म के नाम साध्वी प्राची, आदित्यनाथ जेसे कुछ जो हर धर्म में मोजूद है
जो धर्म के नाम पर नफरत का जहर उगल रहे है यह अराजकता नहीं तो और क्या है  
कुछ कीजिये महाराज .....इनसे रोकिये यह के लिए बड़ा खतरा है ....
आज कही किसी को कुछ खाने पर मार दिया जाता है
कही किसी को देश से निकालने की बात की जा रही है
किसान की हालत जस से तस है गरीब और लाचार होता जा रहा है
कुछ कीजिये जनाब इससे पहले की कोई आप पर भी ऊँगली उठाये ..
अपने संवैधानिक सीमा में रहकर ही सही पर इतना तो कर दीजिये जनाब .............

                     गणतन्त्र का नागरिक

आम आदमी का पैगाम ..

आम आदमी का पैगाम ...

पिछले कई सालों से धर्म सत्ता और राजनेतिक सत्ता मिल कर जनता का शोषण करती रही है .
पता नही इंसान का कितना खून धर्म के नाम पर बहाया गया है .
आज भी मंदिर मस्जिद के नाम पर इंसान को नफरत की घूटी पिलाई जा रही है .
क्या मंदिर मस्जिद और धर्म के नाम पर लड़ने से रोजी रोटी का मसला हल हो जायेगा ?
आज हमे आम आदमी को हिन्दू मुस्लिम के नाम पर बांटा जा रहा है और आपस में भाईचारे के बजाये नफरत के बीज बोये जा रहे है
दुष्ट नेताओं को इस से क्या , उनको तो वोट बैंक की राजनेति करनी है . 
और कुछ लोग जो धर्म का चोला ओढ़े ..धर्म और अंधविश्वास की सीड़ी का उपयोग करके जनता  को असली मुद्दे से भटकाने का काम कर रहे है  ........
जिसका फ़ायदा भृष्ट राज-नेता उठा रहे है. उनका मकसद भी यही है की जनता धर्म का चोला ओढ़े इन पाखंडियों के चक्कर में सोई रहे और यह भृष्ट नेता आम आदमी के वोट को लूट खसूट कर सत्ता पर काबिज रहे....
हद तो तब हो जाती है जब हमारे लोकतंत्र का चौथा स्तम्ब कहलाने वाला मीडिया इन पाखंडी और धर्म के ठेकेदारों को जनता के समुख परस्तुत कर के जनता को धर्म के नाम पर नफरत की अफीम पिलाने का काम कर रहा है ..............यह सब क्या हो रहा है ?
क्या यह सब आम आदमी को सुलाने का सोचा समझा षड्यंत्र नहीं है 
क्या आम आदमी को सुलाने के षड्यंत्र में सभी धर्मों के कुछ पाखंडी और मीडिया बखूबी
शामिल नही है.?....आखिर कबतक हम एक दुसरे का खून सिर्फ धर्म के नाम पर बहाते रहेंगे  
आओ हम सब मिल कर विचार करें की यह कोनसी  साजिश हो रही है  
हमे अपने दुश्मन और दोस्तों  की पहचान हर हालत में करनी होगी  
दोस्तों आज हमारा हिन्दुस्तान बड़े ही नाजुक और खतरनाक दौर से गुजर रहा है . 
आओ अपने घरों से बाहर निकलें और अपनी जिम्मेदारी को पूरा करें ......
और यह तभी होगा जब हम इनका जवाब सिर्फ #मोहब्बत_के_दंगों से देंगे ...तो आईये और जिम्मेदार नागरिक बनकर इस मुहीम में शामिल हो जाईये ............


.यह एक आम आदमी की आवाज़ है .........MJ RAAJ 

12 Nov 2015

आस्तीन के सांप

शर्म आती है की देश का प्रतिनिधि किसी दूसरे देश में जाकर अपने देश की गरीबी का और भ्रष्टाचार का तरह दुनिया के सामने बखान करे क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में कुछ नहीं पाया क्या इस देश में इतनी गरीबी और भ्रष्टाचार था की दुनिया के सामने हम अपने आप को बेबस और लाचार परस्तुत करें
नहीं हम लाचार ना थे ना ही होंगे.....
बस मुद्दे की बात यह हे मोदीजी पहले आप अपने लोगों को ठीक करने और भारत के विकास बारे में सोचिये .....यह जो भारत की अखंडता के साथ खिलवाड़ करने वाले तत्व हे जो नफरत और ज़हर उगलते बयानों से भारत को तोड़ने का काम कर रहे ऐसे सपोलो पर लगाम लगाईये...वरना यही सपोले कल आस्तीन के सांप बन कर ड्सेंगे........जिसकी एक झलक दिल्ली और बिहार में दिख चुकी है ....

9 Nov 2015

हार की खुशियाँ

यह जो भारत है ना जब किसी को बिठाता है तो पलकों पर भी बिठा लेता है लेकिन जब पलकों पर बेठने वाला ही आँखों से छेड़खानी करे तो फिर पटकना भी बहुत अच्छी तरह जनता है
यही आज बिहार मैं हुआ यह पहली बार हुआ है जब किसी के जीतने के ख़ुशी मनाने के बजाये किसी के हारने पर ज्यादा ख़ुशी मनाई जा रही है ....और ऐसा होना भी लाजमी था
ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इस चुनाव के आक्रमक भाषणो मैं सब कुछ था गाय थी दादरी की घटना थी लेकिन बिहार नहीं था जिसका नतीजा सबके सामने है
सच कहा जाये तो यह प्रधानमंत्री की ही हार है मोदी जी ने पूरी ताक़त जो लगाई थी उन्होंने और पूरी पार्टी ने मिलकर लगभग 900 रेलियाँ की और BJP के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह पूरी तरह से बिहार में डटे रहने के बावजूद हार गए ....
याद रखना चाहिए की हर बार विजय रथ का जुमला नहीं उछाला जा सकता .विकास भाषणो में नहीं
असल में करके दिखाना पड़ता है ..जिस विकास का मुद्दा 2014 में उठाया गया था वो बिहार चुनाव आते आते धरातल तक पहुँच गया ..अमित शाह और उसके सिपहसलारों को बिहार के परिणामों ने बता दिया की मुस्लिमो का नाम लेकर हिन्दुओं का ध्रुवीकरण करने की कोशिशें कहीं भी सफल नहीं हो सकती 
सच है की बिहार में BJP  की हार भारत के आने वाले भविष्य की राह तय करेगी .....

वजीरों को भी तो रास्ता मालूम होना चाहिए साहेब
सिर्फ काफिले ही तय नहीं करते सियासत की मंजिल 

2 Nov 2015

वक़्त

ना  जाने कब कैसे वक़्त बे साख्ता उड़ा
जैसे पंख फैलाये आसमां में फाख्ता उड़ा
मिट गयी ना जाने कैसी कैसी  हस्तियां
जब  जब जिससे भी इसका वास्ता पड़ा
बदलने चले थे कई सिकंदर और कलंदर
ख़ाक हुए जिसकी राह मैं यह रास्ता पड़ा
मत कर गुरूर अपनी हस्ती पर ऐ RAAJ
कुछ पल उसे देदे सामने जो फ़कीर खड़ा 

29 Oct 2015

एक पत्र.. नरेन्द्र मोदी के नाम

जनाब .कुछ दिन पहले तक जब भी घर से निकलते थे तो लगता था की हम भारत में जी रहे है

और इस पर गर्व होता था खाने पिने घूमने फिरने की खुली आज़ादी थी लगता था हमारी सरकार हमारे साथ है और लगता था था की हम ऐसे भारत का निर्माण कर रहे है जिससे आने वाली नस्लें और दुनिया याद रखेगी इसीलिए हमने एक मजबूत सरकार चुनी  क्योंकि हम मिलीजुली सरकारों से तंग आ चुके थे  

लेकिन जैसे जैसे दिन बीतते जा रहे है ..कुछ डर सा महसूस हो रहा है .
अब तो  गाय के पास गुजरें तो डर लगता है की कहीं यह किसी समुदाय विशेष को बुरा लग गया तो खेर नहीं
.
चुनाव से पहले  भोला सा मुंह बनाकर आये थे तुम कहा था अच्छे दिन आने वाले हैं
कैसे अच्छे दिन कहाँ के अच्छे दिन…. यहां तो ससुरा जो कुछ अच्छा था वो भी कचरा हो गया
जो सब्ज़ी 10 रुपये किलो मिलती थी आज वही 30 के भाव मिल रही है मोदीजी…. कब आएंगे अच्छे दिन।.  अगर इस तरह से आएंगे अच्छे दिन तो फिर किसी भारतीय को तो नहीं चाहिए
बड़े सयाने बनके आपने कहा था खाली खज़ाना छोड़ कर गयी थी कांग्रेस...
उस खाली ख़ज़ाने में से भूटान नेपाल को हज़ारों करोड़ दे दिए  …. ऐसा जादू देश की महंगाई कम करने में दिखाओ न जनाब ।..
आपके ब्रांड थे एक बाबा आंख मार मारकर पूरे देश को उल्लू बना गए
कहते थे मोदी को जीताओ  पेट्रोल की कीमत आधी करने को कहा था..... कहां गया महंगाई कम होने की बात करने वाला बाबा  आपका बाइक घर पे ताला लगाकर खड़ी करदी है मोदीजी ।
आपने कहा था आप तरक़्क़ी लाएंगे …. लेकिन ये क्याविकास की  जगह ये फूटे भाग वाला नसीब दे दिया  अब हम गरीब लोग अपना फूटा नसीब लेकर कहां जाएं मोदीजी..........
चारों और आपकी सरकार पर हमले किये जा रहे है अवार्ड लोटाये जा रहे है
हमने जिस मोदी को देखा था वो अपने भाषणों में ताल ठोकता था ...
अब तो खामोश है ................................................................कुछ तो बोलिए जनाब 

28 Oct 2015

चल पनघट

तूं चल पनघट में तेरे पीछे पीछे आता हूँ
देखूं भीगा तन तेरा ख्वाब यह सजाता हूँ
मटक मटक चले लेकर तू जलभरी गगरी
नाचे मेरे मन मौर हरपल आस लगाता हूँ
जब जब भीगे चोली तेरी भीगे चुनरिया
बरसों पतझड़ रहा मन हरजाई ललचाता हूँ
लचक लचक कमरिया तेरी नागिनरूपी बाल
आह: हसरत ना रह जाये दिल थाम जाता हूँ

25 Oct 2015

जुमला भा गया

आहट है कैसी ? वक़्त ये कैसा है आ गया
बनाकर बहाना गाय का कोई इंसान खा गया
टूट पड़े सन्नाटे कल तक खामोशियाँ छाई थी
दंगे ही दंगे है वक़्त -ऐ- हुड्दंग जो आ गया
मिलकर भुगतो चुनली हुकूमतें हमने ऐसी ऐसी
अफसोफ़ लोट के दौर -ऐ- रावण जो आ गया
सहते आये थे फिर कुछ बदलने की आस थी
अब ना कर शिकवा तब हमें जुमला जो भा गया
,
............................................................MJ 

21 Oct 2015

दहशत है फैली

दहशत है फैली हर शहर मोहल्ले मोहल्ले
नफरत भरी गलियां देखो इन हुक्मरानों की
.
भाव चवन्नी के बिकती मजबूर काया यहाँ
बेगेरत मरती आत्मा देखो सियासतदानों की
.
तिल तिल मरते कर्ज में डूबे अन्नदाता यहाँ
सुखा है दूर तलक देखो  हालत किसानों की
.
धर्म की बड़ी दीवार खड़ी  है  चारों  और यहाँ
जानवर निशब्द है औकात नहीं इन्सानों की
................................................................MJ
.


14 Oct 2015

Knock or Joke

 ......................तीन दोस्त एक महफ़िल
अमेरिकन : हमने 2010 में ऐसा अविष्कार किया है जिससे आसपास होने वाली किसी भी दुर्घटना का पता आसानी से लगाया जा सके उसे रोका जा सके 

चाइनीज  : हमने 2011 में  ऐसा अविष्कार किया है की जिससे सड़क हादसों में कमी आयेगी और जिससे लोगों को सहायता जल्दी मिल सकेगी
.

हिन्दुस्तानी  : हा हा ठण्ड रख भाई हमारी भी सुन हमने 2015 में ऐसा अविष्कार किया है (digital India ) जिससे फ्रिज में रखी चीजों तक का पता लगा सकते है की दूसरे के फ्रिज में क्या रखा है ताकि किसी को अपनी मर्जी से कुछ भी खाने से रोका जा सके ..

note इस अविष्कार से किसी की  जान भी जा सकती है ..
......ईश्वर आपकी रक्षा करे सरकार भी आपके साथ है 
.

10 Oct 2015

शर्म से सर झुक गया

कल मेने एक विदेशी दोस्त को दादरी घटना की थोड़ी डिटेल बताई  
दोस्त थोडा चोंका, फिर उसने जो जवाब दिया कसम से शर्म से सर झुक गया ..
उसका जवाब था.....तो भाई इसका मतलब यह हुआ की इंडिया में एक जानवर को माता कहा जाता है 
यानि हर नस्ल की माता , नागोरी, थरपारकर, भगनाड़ी, दज्जल, गावलाव ,गीर, नीमाड़ी, इत्यादि इत्यादि,
कोई बड़े सिंग वाली माता...कोई बड़ी पूँछ वाली माता...कोई काली कोई सफ़ेद माता
कोई चितकबरी माता...कोई बड़े थन वाली माता...कूड़ा करकट खाती माता..
फलां फलां यानि हर नस्ल की माता .....
मेने कहा भाई ऐसी बात नहीं है यह तो कुछ तुच्छ किस्म के लोग हिन्दुस्तानीयों के दिल में नफरत भरकर अपनी रोटियां सेक रहे है ..
.उसने कहा यार यह कैसी माता है जिसकी आड़ में लोगों के क़त्ल तक कर दिए जाते है ............
.,कसम से जवाब देते ना बना ..में आहिस्ता से खिसक लिया
जाते जाते पीछे से उसने चिल्लाकर कहा ..अरे भाई सुना है ब्राज़ील में तो एक गीर नस्ल की माता ने तो दूध देने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए..
...
में सोचता रह गया आखिर बन्दे ने गलत भी तो नहीं कहा था एक कड़वी सच्चाई से रूबरू करा गया .

8 Oct 2015

तमाशा चैनल चैनल देखे जा

 देश बर्बाद करके दम लेंगे यह तो बस ठानी है
जो करना है करके रहेंगे सरकारें फिर आनी जानी है
ईश्वर करे रक्षा हमारी,फिर पुलिस भी तो सेवा में है
"बस"काले धन की बात ना करना काला धन रूहानी है
.........................................................................
और हाँ असली चीज तमाशा है बस चैनल चैनल देखे जा  mj

6 Oct 2015

कुर्सी के कीड़े

कुर्सी के कीड़ों ने फिर से ऐसा भड़काया हमको

जिंदा है यह तो मगर हम अपनी जान गंवा बैठे

खामोशियाँ साध ली देखो इन रहनुमाओं ने आज

दहशतों मैं अफ़सोस इन्सानों को इन्सान भुला बैठे

क्या खोया क्या पाया हमने इनकी रहबरी मैं यारो

मस्जिदें तो  आबाद हुई  अफ़सोस ईमान भुला बैठे

मंदिरों को बचाकर भी अफ़सोस भगवान भुला बैठे

.........................................................MJ

4 Oct 2015

देश झुकने नहीं दूंगा

फैले कितने भी दंगे या फिर हो चाहे फसाद यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा .
चाहे मरे कोई इंसान जानवर की मौत यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा 
..
कितनी गंदगी है यहाँ घूम घूम दुनियां को बताया 
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा 
.
आज छाया है दर्दऐ-दादरी सारे जहाँ मैं देखो
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा 
..
नफरतें भर गयी शांतिप्रिय जो थे कभी यहाँ
लेकिन वचन है मेरा मैं यह देश झुकने नहीं दूंगा
..
.........................................................MJ

3 Oct 2015

दादरी की गाय

गाय के जरिये  नफरत फेलाने  वालों  जरा  इन लाइनों पर भी  नजर डालिए ?
...........................................................................
पल पल मैं  बदलती  नफरत की हवाओं को देखो 
जिनके लिए फैली है दहशत जरा उन मांओं को देखो 
.
दर दर की ठोकर खाती इन सपूतों से आस लगाती
नुक्कड़ नुक्कड़ पूँछ हिलाती इन अबलाओं को देखो 
.
जब तक देती है भर भर के दूध पनीर प्यारे  
फिर कूड़ा करकट खाती इन विधवाओं को देखो 
.
इनके फेर मैं ना जाने कितने मरेंगे "अखलाक" 
फिर सियासी रंग चढाते इनके रहनुमाओं को देखो .
.
.....................................................................MJ 


2 Oct 2015

नस्लों मैं भेड़िये

ना जाने यह  कैसे कैसे अभियान चलाते है
फिर इनकी आड़   मैं  यह इंसान जलाते है 
.
जब देखा फ़ैल रही है भाईचारे मशालें यहाँ
फिर यह नफरतों के चुभते  बाण चलाते है 
.
लड़ाकर हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई आपस मैं 
फिर भी नस्लों मैं भेड़िये यह इंसान कहलाते है 
.
गए नहीं कभी मंदिर मस्जिद की चोखट पर
अपना ही धर्म सबसे से ऊँचा हमको सिखलाते है 
.
इतने मैं ना हुआ इनका मकसद पूरा  तो
फिर यह दुष्ट गीता और कुरान जलाते है 
.
फिर ले जाकर इन मुद्दों को संसद तक "राज"
वहां भी लगता  है जैसे हैवान चिल्लाते  है 
.
.............................................MJ deshwali ( RAAJ )





धर्म के ठेकेदार

आज इतनी नफरत फैली है की अगर खुदा भी जमीं पर आकर कह दे 
की मैं खुदा हूँ तो लोग पूछ बैठेंगे किस मजहब के हो भई हिन्दू हो या मुसलमान .....
कौन है यह लोग जो इतनी नफरत फेला रहे है किस मजहब के है यह लोग 
यह कोई इंसानी मानसिकता के तो नहीं लगते
यह जो चार दिवारियों के पीछे एक अलग ही तरह से ग्रस्त लोग अपने धर्म 
का लबादा पहने जानवरों के नाम पर यह हमारी कौमी एकता को नेस्तनाबूत कर रहे है 
और फिर जताते है राष्ट्रभक्ति यह ना तो इंसान लगते है 
ना ही हिन्दू और ना मुसलमान लगते है
कभी यह रांची में मंदिरों के आगे मांस के टुकड़े फेंक कर बवाल मचा देते  है 
और कभी गोमांस खाने की अफवाह फैला कर एक मासूम की जान ले लेते है
फिर शुरू होता है इन धर्म ठेकेदारों का असली मकसद 
नफरत भरे ब्यान ?
इनके नफरत भरे बयानों के कारण ही दादरी जैसी घटना होती है 
इन्हें कोई सरोकार नहीं के मरने वाला हिन्दू था या मुसलमान 
क्योंकि ये धर्म के ठेकेदार केवल नफरत के बीज बोकर आपस में लड़ाकर 
हमारी चिताओं पर रोटियाँ सेकेंगे और फिर इनके पास अपना कुछ है भी नहीं 
खोने को यदि, सहायता भी करते है तो धर्म की शर्त पर, ...
ये लोग तो शासन-शोषण को ही धर्म मानते हैं 
इसलिए अब इनसे मुक्त होना आवश्यक है 
                काहे का धर्म और काहे की राष्ट्रभक्ति ..
                                                                          MJ DESHWALI 

1 Oct 2015

अखलाक़

एक अफवाह उडी के  बीफ  खाया जा रहा  है
हम कितने DIGITAL है यह जताया जा रहा है

कोई  धर्म नहीं शायद  इनका फिर कौन है यह
बीफ के नाम पर क्यूँ नफरतों को बढाया जा रहा है

कुछ तो फर्क कर देता  खूँ  मैं  भी ऐ खुदा
जिनके सहारे कत्ले-ऐ-आम मचाया जा रहा है
.
कसूर इतना था उस गरीब का वो इक मुस्लिम था
जाने किस किस को यह पाठ  पढाया जा रहा है

क्यों और कब तक मरेंगे यूँही कितने (अखलाक )
मातम है कहीं  तो कहीं जश्न मनाया जा रहा है

यहाँ जब कोई  नहीं सुन रहा  उस गरीब  की आह
दूर कही अनसुलझा  मसला-ऐ-कश्मीर सुलझाया जा रहा है |
.
......................................................................MJ DESHWALI



एक मासूम-सी बेटी

प्यारे पापा, जब मैं हॉस्पिटल में एडमिट हुई तब मुझे सांस लेने में परेशानी थी, ब्लड प्रेशर भी कम था और गुर्दे भी ठीक से काम नहीं कर रहे थे, लेकिन अब मैं कुछ ठीक महसूस कर रही हूं। मशीनों से भी तो आजादी मिल गई मुझे।   सबसे अच्छा तब लगा जब आपने मुझे गुरूवार की सुबह कई दिन बाद आपने गोद में लिया। यहां आईसीयू में नर्सेज आपस में बात करती हैं और कहती हैं कि बेटी से भी कोई इतना प्यार कैसे कर सकता है? तब मन ही मन मुस्कराती हूं और सोचती हूं कि वाकई मैं कितनी खुशकिस्मत हूं।
मुझे जन्म देने वाली मां का प्यार तो नसीब नहीं हुआ, लेकिन आपने हर कमी पूरी की।
आपके पास पैसे नहीं थे, इस वजह से मुझे स्लिंग में अपनी गर्दन में लटकाकर रिक्शा चलाया, लेकिन मैं छोटी हूं ना मौसम का यह मिजाज सह नहीं पाई और बीमार हो गई।
मेरी बीमारी में आप कितना परेशान हुए। आपकी परेशानी प्रार्थना बनकर भगवान के दर पहुंची और देखो, उसका प्रभाव आज आपके सामने है। डॉक्टर अंकल ने बताया ना कि मेरा वजन भी बढकर 1735 ग्राम हो गया है।
बस, अब कुछ दिन की ही बात है। ये फंगल इंफेक्शन भी ठीक हो जाएंगे, फिर हम अपने घर चलेंगे। पैसों की परेशानी तो लोगों की मदद से अब दूर हो गई ना पापा। मैं भी बड़ी होकर पढ़ूंगी-लिखूंगी। शुक्रिया उन सभी लोगों को जिन्होंने मेरे पापा की मदद की और मेरे लिए प्रार्थना।
.
................................................MJ

एक जुमला था

जिस तरह से डिजिटल इंडिया (DigitalIndia) का डंका बजाया  जा रहा है
सोचता हूँ  शर्म  करू या गर्व
                                        चलो पहले थोडा गर्व करते है
आजकल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह से हिन्दुस्तान को दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहे है उससे लग रहा है 

के  हमारा देश सचमुच  Digital हो रहा है जिस तरह से दुनिया की बड़ी बड़ी कंपनिया भारत की तरफ उम्मीद भरी नजरो 
से देख रही है तो लगता है की हमारा अच्छा दौर शुरू हो चूका है
और जिस तरह से विकास की लहरें उठ रही है तो लगता है हमारा आने वाला कल बहुत ही सुनहरी होगा
और इसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही जाता है ....  .जिसका हमें गर्व है 

                                                        अब बात शर्म की जाये 
शर्म आती है की देश का प्रतिनिधि किसी दूसरे देश में जाकर अपने देश की गरीबी का और भ्रष्टाचार का 
दुनिया के सामने बखान करे वो भी किसी देश के प्रतिनिधि की तरह नहीं बल्कि एक पार्टी खास के प्रतिनिधि की तरह 
क्या इस देश ने पिछले 60 सालों में कुछ नहीं पाया क्या इस देश में इतनी गरीबी और भ्रष्टाचार था 
की जिसको मिटाने के लिए अब हम दूसरे देश में जाकर "मेक इन इंडिया" के लिए हाथ फेलायें 
यानी मोदीजी पहले आप भारत को ठीक कीजिए।
 इसी तरह डिजिटल इंडियावगैरह के लुभावने नारों से उनका क्या लेना-देना जो इस तरह के नारों 
का मतलब भी नहीं जानते हो ...जो गरीब जनता 15 लाख के वादे को वादा मान बेठी थी
(खैर वो तो एक जुमला था) 
शर्म आती है की 125 करोड़ आबादी का राष्ट्र भारत इतना अपाहिज़ हो चूका हैं। 
जिस तरह से तो जो यह इतना तामझाम किया जा रहा  है इससे हासिल क्या होगा 
सच है की कुछ वक़्त पहले (चुनाव से पहले)तक जो देश के लोगों में एक जोश सा छाया था जो इंदिरा 
और नेहरु के ज़माने भी नहीं था जो बड़े बड़े वादे किये गए थे जो की अबतक जारी है. 
................................................................................................MJ

30 Sep 2015

गाय का गोबर

" गाय का गोबर एटम बम को बेअसर कर देता है " -आरएसएस RSS
अगर यही बात है तो फिर भारत को किसी से डरने की ज़रुरत नहीं 
क्योंकि हमारे यहाँ तो हर गाँव की हर गली में एटम बम निरोधक
दस्ते रखे हुए है .
फिर तो इंडिया की हर गोशाला को एटम बम निरोधक आर्मी कैंप घोषित कर देना चाहिए ...
फिर तो हमें दुनिया को इस समस्या से निजात दिला देनी चाहिए
क्योंकि अमेरिका हमेशा एटम बम बनाने वाले देशो
के खिलाफ रहा है
फिर तो UN को किसी भी एटम बम बनाने वाले देश पर पाबन्दी नहीं लगानी चाहिए .क्योंकि .इसका इतना आसान सा हल तो RSS ने
निकाल ही लिया है
फिर क्यों इतनी बड़ी बम निरोधक आर्मी होने के बावजूद हम पड़ोसी देशो से सीधे दो दो हाथ नहीं करते ..किस बात का डर है
कही डर यह तो नहीं के पडोसी देशों के पास हम से अच्छी नसल की गायें हो
और हमसे ज्यादा एटम बम निरोधक पदार्थ हो .???
......................................................................MJ DESHWALI