19 Dec 2015

18 साल की उम्र तक बलात्कार करते रहिये ...

18 साल की उम्र तक बलात्कार करते रहिये ...
 जी हां---अगर आपकी उम्र 18 साल से कम है तो आप बेफ़िक्र होकर बलात्कार कीजिये या फिर कोई भी जुर्म कीजिये हिन्दुस्तान का कानून आपका कुछ भी नहीं बिगाड़ सकता .
अगर आपकी भी मानसिकता इस तरह की है तो फिर नोच डालिए किसी निर्भया की इज्ज़त को
जितनी हेवानियत है आजमां लीजिये ...देर किस बात की है India gate फिर से आपके जुर्म का इंतज़ार कर रहा है ..जनता को भी तो मोमबत्ती लेकर सड़कों पर उतरने का मोका मिलना चाहिए   
अगर गलती से कभी पकडे भी गए तो चिंता ना करे इसकी भी सुविधा हमारा कानून देता है
आपका कोई कुछ नहीं उखाड़ सकेगा आपके लिये केस लड़ने वाले NGO और बड़े बड़े वकील लाइन में खड़े होंगे आपको बस 2-3 साल तक  बाल सुधारगृह “ में मोज मस्ती करवाई जाएगी जेल नहीं होगी
बस दुःख इतना है की आपको दुनिया की नजरो से दूर रखा जायेगा ताकि जब आप 2-3 साल मस्ती मरने करने बाद जब बाहर आओगे तो आपको कोई पहचान ना सके .की यही वो बलात्कारी है
जब आप बाहर आओगे तो बड़े बड़े नेता और समाजसेवी आपके पुनर्वास की तैयारी में लगे होंगे
पुनर्वास के नाम पर आपको हजारों रूपये मिलेंगे ..आपके के लिए नोकरी भी तलाशी जाएगी ..

लेकिन हाँ ---बस आपकी उम्र 17 साल 364 दिन से कम होनी चाहिए 

13 Dec 2015

पैगंबर मुहम्मद की शान में गुस्ताखी

सच है की जिनकी सोच इस्लाम के बारे मैं गंदी है
वो हमेशा अपनी गंदी सोच का ही प्रमाण देगा ।।
इनका मुद्दा हमेशा से इस्लाम को नीचा दिखाना और
ईस्लाम का नेगेटिव प्रमोशन करना ही है ।
दुनिया जानती है की मुसलमानों के दिलो में
पैगंबर मुहम्मद (सल्ल.) की क्या इज़्ज़त क्या रुतबा है
जिनको खुदा ने सारी इंसानियत के लिए शांति और
अमन का दूत बनाकर कर भेजा था उनकी शान में
बार बार गुस्ताखी करना किस बहादुरी का नाम..
पैग़म्बर मुहम्मद (सल्ल.) के खिलाफ़ की गई टिप्पणी देश का
वातावरण बिगाड़ने का प्रयास है .जो गन्दी मानसिकता दर्शाती है
अभिव्यक्ति की आज़ादी की बात करने वालो ।।
आज़ादी का ये मतलब नही के किसी भी धर्म की आस्था
को ठेंस पहुंचाई जाए आज़ादी तो यह है के सच को सच
लिखा जाए बोला जाए।
अगर दम है तो इजराइल के ज़ुल्मो की दास्ताँ बारे में बोलो ।।
अगर दम है तो मज़लूमो की चीख पुकार के बारे में आवाज उठाओ।।
अगर शर्म है तो सीरिया के हालात के बारे में बोलो ।।
अगर इंसानियत है तो अमरीका के बर्बरता इराक़ पर बोलो ।।
अगर दिल है तो फलस्तीन की माओं का दर्द सुनाओ ।।
अगर दर्द है तो गुजरात आसाम के किस्से ब्यान करो ।।
यह है अभिव्यक्ति की आज़ादी..
किसी धर्म के बारे मैं गलत भाषा इस्तेमाल करना नहीं

लेकिन यह जो दोहरी मानसिकता के लोग है वो  एक तरफ़ा ही बोलते लिखते थे
और बोलते लिखते  रहेंगे लेकिन सच कभी नही बोलेंगे ।।

11 Dec 2015

" प्रेम रतन निजात पायो "

आज साबित हो गया की पैसे वाला कानून भी खरीद सकता है आश्चर्य नहीं होना चाहिए यह सब पैसे का ही खेल हे की ,गुजरात.हाशिमपुरा और ना जाने कितने दंगो के अपराधी मजे से घूम रहे है इस तरह के केस का फैसला तो अदालत के बाहर ही हो जाता है अदालत में तो सिर्फ दस्तखत होते है
वो क्या है ना पैसे में गर्मी ही इतनी होती है कि किसी का भी ईमान पिघल जाये वरना निचली अदालत सबूतों के आधार पर जिसको 5 साल की सजा सुनाती है और आज 10 महीने बाद उपरी अदालत कहती है सलमान के खिलाफ सबूत ही नहीं है ....भैय्या जनता इतनी भी बेवक़ूफ़ नहीं है .सब जानती है .               ''खैर पतंग उड़ाना कभी कभी फायदेमंद भी होता है .''बस गलती मरने वाले गरीब की थी वो फुटपाथ पर सो रहे थे उसे इतना तो ध्यान रखना चाहिए था की फुटपाथ सोने की जगह नहीं होती कभी किसी अमीर की गाड़ी भी फुटपाथ से गुजर सकती है .भैय्या गलत तो गरीब होता है और हमेशा गलत ही ठहराया जाता है खेर सब छोड़ो चलो सलमान शाहरुख़ की फिल्मे आ रही है उसपे चर्चा करो यहाँ लोगों का ईमान मर चूका है

8 Dec 2015

फलस्तीन की मिटटी


शायद तेरी कोख में बुझदिल पैदा नहीं होते ...
इसलिए ऐ फलस्तीन की मिटटी तुझे सलाम ..

जब भी फलस्तीन का जिक्र आता है जहन में एक बहादूर और सहन करने वाले लोगों की
छवि उभर आती है फलस्तीन की जनता पर क्रूर इस्राइली जुल्म की इंतिहा सालों से जारी है......
लेकिन ..........
फलस्तीन की उस जमीन को सलाम
जिसके के हर बगीचे को दुश्मनों ने रोंद दिया जहाँ की हर खिड़की का शीशा तक जुल्म का शिकार होकर टुटा है..स्कूल अजायब घर नजर आते है...उस देश की हर वादी में अमन का कत्ल हुआ है.
उस जमीन के हर घर में एक शहीद की तस्वीर दीवार पर जरूर मिलेगी है.......
उस जमीन की हर औरत को सलाम..........
जो खून से लथपथ अपने बच्चो को गोद में लेकर कहती है ऐ जालिम इससे ज्यादा तेरे जुल्म की इन्तिहा क्या होगी लेकिन फ़िक्र ना कर में ऐसे बहादुर बच्चो को फिर जन्म दूंगी
उस जमीन के हर बच्चे को सलाम....
यतीम होना इस देश के बच्चे शायद जानते तक न हो फिर भी दुश्मन के सामने खड़े होकर कहते है .
ढा ले जुल्म तू आखरी हद तक ऐ दुश्मन लेकिन .हम तेरे सामने नहीं झुकेंगे ..हम भी जवानी में कदम रखेंगे हम फिर लड़ेंगे ....क्योंकि हमें बहादुरी सिखाई जाती है. बुजदिली नहीं


ऐ फलस्तीनियों आखिर तुम किस मिट्टी के बने हो ..कितना जुल्म सहन करोगे .....